ऑनलाइन सुरक्षित रहें

आपके फोन, लैपटॉप और पैसे के लिए आसान सुरक्षा चेकलिस्ट

यह आम लोगों के लिए है, कंप्यूटर के जानकारों के लिए नहीं। हर बात में लिखा है कि कहाँ टैप करना है और क्यों ज़रूरी है। करते जाइए और टिक लगाते जाइए - आपका टिक कहीं नहीं भेजा जाता, वह आपके अपने फोन या कंप्यूटर में ही रहता है।

छह बातें जो ज़्यादातर ठगी रोक देती हैं

  1. ओटीपी किसी को भी मत बताइए

    न बैंक को, न डिलीवरी वाले को, न उस दोस्त को जो कहे कि उसने गलती से आपको भेज दिया। कोई असली कंपनी कभी ओटीपी नहीं माँगती। और वह आखिरी वाला - 'गलती से चला गया' - लगभग हमेशा ठगी ही होती है।

  2. अगर फोन पर कोई डराए या जल्दी मचाए, तो काट दीजिए

    फिर अपने पास पहले से मौजूद नंबर पर फोन कीजिए - अपनी फोनबुक से, पासबुक से, या कार्ड के पीछे से। कभी उस नंबर पर नहीं जो फोन करने वाले ने दिया हो। अगर बात सच है तो दस मिनट बाद भी वहीं रहेगी।

  3. ऐप सिर्फ़ Play Store या App Store से ही डालिए

    WhatsApp, एसएमएस या ईमेल के लिंक से कभी नहीं। .apk वाली फाइल जो आपको भेजी जाए, वह लगभग हमेशा हमला होती है - चाहे भेजने वाला जान-पहचान का ही क्यों न हो।

  4. अपनी स्क्रीन किसी को दिखाइए मत, और चलाने मत दीजिए

    AnyDesk, TeamViewer, QuickSupport जैसे ऐप। कोई बैंक, कोई Amazon, कोई बिजली विभाग और कोई सरकारी दफ्तर आपसे ऐसा ऐप कभी नहीं डलवाता। अगर कोई कहे, तो वह हर बार ठगी ही है।

  5. UPI पिन सिर्फ़ पैसे भेजने के लिए है, लेने के लिए कभी नहीं

    आपको पैसे देने के लिए किसी को आपका पिन, QR स्कैन या 'अप्रूव' की ज़रूरत नहीं होती। अगर कोई कहे कि पैसे लेने के लिए यह करना पड़ेगा, तो वह आपसे पैसे ले रहा है, दे नहीं रहा।

  6. फोन और लैपटॉप अपडेट रखिए

    ज़्यादातर हमले उसी खामी से होते हैं जो महीनों पहले ठीक की जा चुकी है। जब फोन अपडेट माँगे तो हाँ कीजिए - उसी शाम, अगले महीने नहीं।

यह गाइड क्या है

ऑनलाइन सुरक्षित रहें भारत के परिवारों के लिए एक मुफ़्त डिजिटल सुरक्षा गाइड है, जो ऐसे लोगों के लिए आसान भाषा में लिखी गई है जो कंप्यूटर के जानकार नहीं हैं। इसमें Android फोन, iPhone, Windows या Mac लैपटॉप और घर के वाई-फाई राउटर पर देखने वाली हर सेटिंग बताई गई है, और आज चल रही ठगी समझाई गई है: UPI और ओटीपी की धोखाधड़ी, तथाकथित डिजिटल अरेस्ट, AI से आवाज़ की नकल, नकली ट्रेडिंग ऐप, टास्क वाली नौकरी की ठगी और लोन ऐप की ब्लैकमेल। हर बात में लिखा है कि कहाँ टैप करना है और क्यों ज़रूरी है। WhatsApp सुरक्षा चेकलिस्ट है, आधार लॉक करने का हिस्सा है, और उस दिन के लिए कदम-दर-कदम पेज है जब कुछ गलत हो जाए - 1930 साइबर धोखाधड़ी हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in के साथ। यह गाइड अंग्रेज़ी, हिन्दी, गुजराती और मराठी में है, किसी भी फोन पर चलती है, आपके बारे में कुछ नहीं रखती, और माता-पिता, बच्चों और दोस्तों के साथ बाँटने के लिए बनी है।

लोग अक्सर क्या पूछते हैं

कैसे पता चले कि मेरा फोन हैक हो गया है?

आम निशानियाँ हैं: बैटरी जल्दी खत्म होना, ऐसा डेटा खर्च जो समझ न आए, ऐसे ऐप जो आपने नहीं डाले, और ऐसे कामों के ओटीपी या बैंक मैसेज आना जो आपने किए ही नहीं। Android पर Settings ▸ Accessibility ▸ Downloaded apps और Settings ▸ Apps ▸ Special app access ▸ Device admin apps खोलिए - वहाँ कुछ भी अनजान हो तो यह गंभीर चेतावनी है। शक हो तो वाई-फाई और मोबाइल डेटा बंद कीजिए, किसी दूसरे डिवाइस से ईमेल और बैंक के पासवर्ड बदलिए, और मदद वाले पेज के कदम अपनाइए।

मैंने गलती से ओटीपी बता दिया। अभी क्या करूँ?

मान लीजिए कि पैसे जाने ही वाले हैं। कार्ड पर छपे नंबर से बैंक को फोन करके खाता या कार्ड ब्लॉक कराइए, फिर 1930 पर फोन कीजिए। जिस अकाउंट का ओटीपी था उसका और अपने ईमेल का पासवर्ड बदलिए। यह देखने के लिए मत रुकिए कि कुछ होता है या नहीं - पहला घंटा ही वह समय है जब ट्रांसफर रोका जा सकता है।

क्या पैसे लेने के लिए QR कोड स्कैन करना या UPI पिन डालना पड़ता है?

नहीं, कभी नहीं। QR कोड स्कैन करके पिन डालने से पैसे हमेशा बाहर जाते हैं। पैसे लेने के लिए आप सिर्फ़ अपना UPI ID या फोन नंबर देते हैं। जो कोई कहे कि पैसे पाने के लिए स्कैन करना, request अप्रूव करना या पिन डालना होगा, वह आपसे पैसे ले रहा है।

फोन पर ठगी वाली कॉल कैसे रोकूँ?

WhatsApp में Settings ▸ Privacy ▸ Calls ▸ Silence unknown callers चालू कीजिए। फोन में डायलर का स्पैम प्रोटेक्शन चालू कीजिए और अपने ऑपरेटर के पास DND रजिस्टर कराइए। ठगी वाले नंबर sancharsaathi.gov.in के Chakshu हिस्से से रिपोर्ट कीजिए ताकि वे सबके लिए ब्लॉक हों। और किसी अनजान अंतरराष्ट्रीय मिस्ड कॉल पर कभी वापस फोन मत कीजिए।

1930 क्या है और कब फोन करना चाहिए?

1930 भारत की राष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी हेल्पलाइन है। जैसे ही ठगी से खाते से पैसे जाएँ, उसी पल फोन कीजिए - अगले दिन नहीं। शुरू के कुछ घंटे ही वह समय है जब ट्रांसफर रोका जा सकता है। साथ में cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत भी दर्ज कीजिए; दोनों ज़रूरी हैं।

आधार लॉक कैसे करूँ?

myaadhaar.uidai.gov.in पर जाइए, आधार नंबर और ओटीपी से साइन इन कीजिए, और Lock/Unlock Biometrics चुनिए। इससे फिंगरप्रिंट से होने वाली पैसों की ठगी रुक जाती है। वहीं पर VID भी बना लीजिए ताकि आधार नंबर की जगह वही दे सकें, और masked आधार डाउनलोड कर लीजिए जहाँ कोई कॉपी माँगे वहाँ देने के लिए।

Android फोन में कौन सा एंटीवायरस डालूँ?

ज़्यादातर लोगों के लिए कोई नहीं। Play Protect पहले से अंदर है, और Android 16 में Advanced Protection का स्विच किसी भी बाहरी ऐप से ज़्यादा करता है। एक अतिरिक्त चाहिए तो C-DAC का M-Kavach 2 मुफ़्त है, बिना विज्ञापन के और आपका डेटा नहीं बेचता। मुफ़्त क्लीनर और बूस्टर ऐप से बचिए - वे ज़्यादातर विज्ञापन दिखाते हैं और डेटा जमा करते हैं।

क्या सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग सुरक्षित है?

नहीं। एयरपोर्ट, होटल, कैफे या स्टेशन पर अपने फोन का हॉटस्पॉट इस्तेमाल कीजिए। अगर सार्वजनिक नेटवर्क से जुड़ना ही पड़े, तो उस पर बैंकिंग मत कीजिए, और वाई-फाई के लॉगिन पेज पर Google या Facebook से साइन इन कभी मत कीजिए - किसी असली नेटवर्क को इसकी ज़रूरत नहीं होती।

अपने माता-पिता के फोन को ठगी से कैसे बचाऊँ?

तीन चीज़ें ज़्यादातर काम कर देती हैं: घर का कोड वर्ड तय कीजिए ताकि घबराई हुई कॉल की जाँच हो सके; उनके फोन में अपने पैनल से NextDNS लगाइए ताकि ठगी वाली साइटें खुलने से पहले रुकें; और इस साइट की चेकलिस्ट एक बार साथ बैठकर पूरी कीजिए। उन्हें साफ़ बताइए कि जब भी कुछ गलत लगे, आपको फोन करने पर वे कभी डाँट नहीं खाएँगे।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

एक ठगी जिसमें वर्दी पहने लोग वीडियो कॉल पर कहते हैं कि आपका आधार, सिम या बैंक खाता किसी अपराध से जुड़ा है, और आपको कैमरे पर और चुप रखते हैं जब तक आप नाम साफ़ कराने के लिए पैसे न भेज दें। भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है। कोई अफसर वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करता और न मामला निपटाने के लिए पैसे माँगता है। फोन काटिए और किसी को बताइए।